Holding Hands & Making Smiles

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खामोश निगाहें…

जब-जब मेरी चाहत ने उससे जवाब माँगा उसने ख़ामोशी का दामन थाम लिया न ही मेरी ख़ुशी का हिस्सा बन सकती है और न ही मेरे ग़म का कारण बनना चाहती है पर उसकी ख़ुशी किस बात में हैं, वो बताती नहीं हम भी उसकी ख़ुशी की तलाश में एक हिस्सा बन अपना एक छोटा … Continue reading खामोश निगाहें…

जब मैं लिखता हूँ

जब मैं लिखता हूँ तो लफ्ज़ आसमान से या किसी किताब से छांटकर नहीं लाता दिल में कहीं कोई अनकही आवाज़ गूंजती है लोगों को बोलना आया नहीं उनको समझाने की कोशिश करने का मन किया नहीं समझते सभी अपने नज़रिए के दायरे में ही हैं मन की आवाज़ ने खुद को लफ़्ज़ों में तराशा … Continue reading जब मैं लिखता हूँ

बाँध लो कविता में…

मुझे बांध लो कविता में और साथ ले जाओ मुझे नहीं रहना यहाँ उदास इस जहाँ में तुम साथ होगे तो सब सह लेंगे हँसकर लिख दो आज मुझे तोड़ तो मुझे एक नज़्म में उतार दो कागज़ में स्याही कर दो मुझे कोई दाग न छोड़ना लफ्ज़ भी रोते हैं जानते हो तुम जब … Continue reading बाँध लो कविता में…