जो हादसा न हो सका

एक पल तक मैं कुछ आराम से बैठा बातें फ़रमा रहा था फिर अचानक कुछ जल्दी हुई, मैं उठकर चल दिया चलने लगा तो दो कदम के बाद ही टकरा गया न बढ़ सका कुछ आगे, पावँ मेरा कुछ बंधा सा गया मन न माना रुकने का, ज़िद्द में आगे बढ़ता गया जाता कहाँ, कुछ … Continue reading जो हादसा न हो सका

Lonely night…

दिल बहुत उदास था मैंने उनसे बात न की थी हर रोज़ शाम-सवेरे कभी न कभी उनसे बात हो जाया करती थी फिर आज क्या था जो मैं घबराया सा हुआ था उसकी सुकून भरी आवाज़ आज कानों में कुछ और ही थी ये एहसास तब हुआ जब रात को मैंने उनके दिल की बात … Continue reading Lonely night…

अँधियारा

अंधियारे में बैठकर उजाले को देखना, और उसकी खुद से दूरी का कारण जानना, कि वो रोशनी मुझपर क्यों नहीं है या मैं क्यों मजबूर हूँ उसे गले न लगाने में | वह उजाला सुनसान है, पर मुझे पता है, बहुत चेहरे छुपे है इस अंधियारे में | कोई चेहरा नज़र आता है रौशनी में … Continue reading अँधियारा