Hope V/s Fear: a thought for my own

“ज़िन्दगी में उम्मीद नहीं तो कुछ और भी तो कहाँ है,

चलने उसी पर है, चाहे वो अपनी हो या दूसरों की…”

(if there’s not hope, there’s nothing there in life,

will live on that, whether it’s ours or theirs…)