इंतजार

इस बंद चारागाह में इंतजार करना ही अब मेरी किस्मत है, मैं कैद नहीं हूँ, पर ख्यालों के पंख अब कट चुके हैं न कोई रौशनी, न कोई आहट, बस दूर क़दमों की चहलपहल आँखें बंद करता हूँ, तो खुद को आसमान में उड़ता हुआ महसूस करता हूँ सिर्फ बादलों का सफ़ेद धुआं, इतना सफ़ेद … Continue reading इंतजार

हर वक़्त तलाश में…

क्यों बर्दाश्त नहीं करता मैं, क्यों बेतुकी बातों के आगे दीवार बन बैठता हूँ, मैं अपनी आदत से मजबूर हूँ, खुद को बेकदर बेवजह परेशां कर बैठता हूँ, वही आदत कि कुछ तो कहना ही है, अपने को अपने लिए अपने तक बहुत सीमित रखा है मैंने, पर बात जब अपने से ज्यादा बाकी लोगों … Continue reading हर वक़्त तलाश में…

Mother

Saw you the other day; you lie helpless on a bed with a device pumping air into your body. Two men helping you walk, one girl feeding you porridge and other girl wiping your drool. Eyes and hands gestures for what you wanted. You blinked and called me nearer. Your trembling lips said my […] via … Continue reading Mother

कल से आज को देख रहा हूँ…

ऐसे हालात जब रोज़मर्रा की चीज़ें हादसा लगने लगी तब कुछ पल ठहरा, देखा आज कहाँ हूँ ये जानना बहुत ज़रूरी था कि ऐसा क्यों है शायद एक लम्बे अरसे से ज़िन्दगी बस जी रहा हूँ एक अरसे पहले ही एक हादसे ने ज़िन्दगी बदल दी थी आज हर लम्हा एक हादसा है यकीन करना … Continue reading कल से आज को देख रहा हूँ…

वक़्त तो दरिया है, बह जाता है…

अगर तुम कह देते जो कहना चाहते तो बात यहाँ तक न पहुँचती एक दुसरे की मौजूदगी हमें यूँ बेचैन न करती ठुकरा दिया होता तुमने अपने अहम् को हमने अपने डर को तो आज मैं लिख न रहा होता और तुम पढ़ न रहे होते...

उलझन

घिरे आज उन उलझनों में फंसकर जिनमें हुनर सीखा था उम्मीद टूटती नज़र आई जिसे हमेशा बचाकर रखा था दूर इतना निकल आये कि तनहा हो गए साथ रहते हुए भी सबसे जुदा हो गए मेरी पूछ सिर्फ तन्हाइयों में है महफ़िलें रुसवा हो गयी, सपने खो गए आज थक-हार आ गया हूँ वहीँ उस … Continue reading उलझन

बहुत आसान है…

कितना आसान है जज़बातों को बयाँ करना कितना आसान है जज़बातों को दबा देना कितना आसान है जज़बातों से डर जाना कितना आसान है जज़बातों से हार जाना कितना आसान है गुस्से में गुस्सा करना कितना आसान है प्यार से बातें करना कितना आसान है गम पर आँसू बहाना कितना आसान है बातों पर रूठ … Continue reading बहुत आसान है…

दुनिया ऐसे ही चलती है

तुम्हे मालूम नहीं दुनिया कैसे चलती है हाकिमों की गुलामी और मौत यहाँ कुछ सस्ती है अरमानों की दुनिया यहाँ से कुछ आगे जाकर बस्ती है धर्म ज्ञान कहलाता है और ज्ञान में साजिशें चलती है सच झूठ सबका अपना-अपना है यहाँ हकीक़त तो इरादों की परछाई में चलती है तुम्हे मालूम नहीं दुनिया कैसे … Continue reading दुनिया ऐसे ही चलती है